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How to Find / Select Research Group/Supervisor for MS, PhD Scholarship | Dr Rizwana Mustafa

Dr Rizwana Mustafa·
5 min read

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TL;DR

MS/PhD सुपरवाइजर चुनने की मुख्य कसौटी आपके रिसर्च प्रश्न और ग्रुप की चलती रिसर्च के बीच ओवरलैप है।

Briefing

MS और PhD के लिए रिसर्च ग्रुप/सुपरवाइजर चुनने का सबसे बड़ा नियम यह है कि आपका रिसर्च प्रश्न और उस ग्रुप की चलती रिसर्च—दोनों के बीच “ओवरलैप” जितना ज्यादा होगा, उतनी ही एक्सेप्टेंस की संभावना बढ़ेगी। इसी लक्ष्य के लिए इंटरनेशनल लेवल पर सक्रिय रिसर्चर्स और उनके ग्रुप्स को ढूंढने का व्यावहारिक तरीका बताया गया है: देश, यूनिवर्सिटी, फिर उस यूनिवर्सिटी के भीतर रिसर्च ग्रुप/फैकल्टी तक जाना—और हर स्टेप पर यह जांचना कि आपका काम किस हद तक उनके मौजूदा रिसर्च इंटरेस्ट से मैच करता है।

प्रक्रिया की शुरुआत “प्रायोरिटी सेट” करने से होती है—किन देशों में अप्लाई करना है। इसके बाद चुने गए देश के हिसाब से टॉप यूनिवर्सिटीज की लिस्ट निकालकर वेबसाइट्स पर जाना सुझाया जाता है। उदाहरण के तौर पर कनाडा के लिए यूनिवर्सिटीज की लिस्ट (कुल 71 यूनिवर्सिटीज) और उनके डिपार्टमेंट्स/कीवर्ड्स के आधार पर खोज का तरीका बताया गया। फिर कीवर्ड को लेकर काम शुरू होता है—जैसे PhD/एमएस के बाद भी उसी टॉपिक पर आगे बढ़ना हो तो उसी रिसर्च एरिया से जुड़े कीवर्ड्स के खिलाफ अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में “पोजीशन/ग्रुप” ढूंढे जाते हैं।

एक ठोस उदाहरण में “ionic liquids” को कीवर्ड बनाकर अलग-अलग देशों (जैसे जर्मनी, UK, ऑस्ट्रेलिया) की यूनिवर्सिटीज में रिसर्च ग्रुप्स खोजे गए। लक्ष्य यह रहता है कि 10–15 अच्छे रिसर्च ग्रुप्स की शॉर्टलिस्ट बन जाए, ताकि देश और ग्रुप दोनों आसानी से सेलेक्ट हो सकें। इसके बाद हर क्लिक किए गए लिंक की जांच जरूरी बताई गई—यह सुनिश्चित करना कि लिंक वास्तव में उसी यूनिवर्सिटी के रिसर्च ग्रुप पेज पर ले जाए, वरना असंबंधित पेजों से समय बर्बाद होगा।

ग्रुप पेज पर सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “रिसर्च इंटरेस्ट” पढ़ना है। उद्देश्य यह देखना है कि आपका पिछला काम/करने वाला काम और ग्रुप की मौजूदा दिशा कितनी मिलती है। ओवरलैप जितना ज्यादा—उतनी ज्यादा relevance और acceptance की संभावना। ग्रुप के लीडर/प्रोफेसर का प्रोफाइल, बायोग्राफी, ईमेल/फोन, ग्रुप में कितने लोग हैं (PhD/मास्टर्स रिसर्चर्स सहित), और ग्रुप किस रिसर्च एरिया में सबसे ज्यादा एक्टिव है—इन सबका डेटा निकालने पर जोर है। साथ ही ग्रुप के “फेकल्टी/लैब” पेज पर ईमेल आईडी, प्राइमरी फोकस, रिसर्च इंटरेस्ट और हालिया पब्लिकेशंस जैसी जानकारी देखने को कहा गया ताकि यह पता चले कि ग्रुप अभी किस चीज पर काम कर रहा है।

सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं—पर्सनल कनेक्ट बनाने की सलाह भी दी गई है। लिंक्डइन जैसे प्रोफाइल्स पर नियमित इंटरैक्शन (कमेंट/लाइक) और फिर रिसर्च इंटरेस्ट दिखाकर ग्रुप/सुपरवाइजर से संपर्क करने की रणनीति बताई गई है। एक और तरीका डिपार्टमेंट-वाइज फैकल्टी सर्च करना है: यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट (जैसे Chemistry) के भीतर Research & Teaching Faculty और उनके रिसर्च एरियाज/प्रोजेक्ट्स देखना। यहां भी वही कसौटी लागू होती है—आपके और उनके रिसर्च सर्कल का ओवरलैप जितना ज्यादा, उतनी ज्यादा फिट। उदाहरण में “Natural Product Total Synthesis” जैसे रिसर्च एरिया के लिए संबंधित फैकल्टी/प्रोजेक्ट्स की PDF/डिटेल्स देखने और अपने पिछले काम के आधार पर सबसे relevant ग्रुप चुनने की बात आई।

कुल मिलाकर, इंटरनेशनल लेवल पर सुपरवाइजर चुनने की रणनीति “कीवर्ड + यूनिवर्सिटी/डिपार्टमेंट + रिसर्च इंटरेस्ट ओवरलैप + हालिया काम + पर्सनल कनेक्ट” के संयोजन पर टिकी है—ताकि लैब में रहते हुए भी इंटरनेशनल-लेवल की रिसर्च को वास्तविक रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

Cornell Notes

MS/PhD के लिए रिसर्च ग्रुप/सुपरवाइजर चुनते समय सबसे निर्णायक चीज “रिसर्च इंटरेस्ट ओवरलैप” है—आपका रिसर्च प्रश्न और ग्रुप की चलती रिसर्च जितनी ज्यादा मैच करेगी, उतनी ही relevance और acceptance की संभावना बढ़ेगी। प्रक्रिया में पहले देश/यूनिवर्सिटी की प्राथमिकता तय की जाती है, फिर आपके कीवर्ड्स (जैसे ionic liquids, electro-phoresis, stem cells, bioinformatics) के आधार पर ग्रुप्स खोजे जाते हैं। हर ग्रुप पेज पर रिसर्च इंटरेस्ट, टीम/मेंबर्स, हालिया पब्लिकेशंस, और संपर्क विवरण देखना जरूरी है। अंत में पर्सनल कनेक्ट बनाकर (जैसे प्रोफाइल्स पर इंटरैक्शन) अपने रिसर्च इंटरेस्ट के साथ संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

देश और यूनिवर्सिटी चुनने की शुरुआत कैसे करनी चाहिए?

सबसे पहले प्राथमिकता तय करें कि किन देशों में रिसर्च कोऑपरेशन/स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करना है। फिर उन देशों की टॉप यूनिवर्सिटीज की लिस्ट निकालें और उसी के आधार पर आगे की खोज करें। उदाहरण में कनाडा के लिए यूनिवर्सिटीज की लिस्ट (71 यूनिवर्सिटीज) और उनके डिपार्टमेंट्स/कीवर्ड्स के जरिए ग्रुप्स खोजने का तरीका बताया गया।

सही रिसर्च ग्रुप खोजने के लिए कीवर्ड्स का रोल क्या है?

कीवर्ड्स वही रखें जो आपके रिसर्च टॉपिक/प्रश्न से सीधे जुड़े हों। एमएस/पीएचडी के बाद भी अगर उसी टॉपिक पर आगे बढ़ना है तो उसी एरिया के कीवर्ड्स के खिलाफ यूनिवर्सिटीज में ग्रुप्स/पोजीशंस खोजें। उदाहरण में “ionic liquids” को कीवर्ड बनाकर अलग-अलग देशों की यूनिवर्सिटीज में संबंधित रिसर्च ग्रुप्स ढूंढे गए।

ग्रुप पेज पर किन चीजों को देखकर ओवरलैप तय करना चाहिए?

सबसे पहले रिसर्च इंटरेस्ट पढ़ें और तुलना करें कि आपका पिछला/आने वाला काम ग्रुप की मौजूदा दिशा से कितना मिलता है। फिर ग्रुप लीडर/प्रोफेसर का प्रोफाइल, टीम में कौन-कौन हैं, ग्रुप किस रिसर्च एरिया में सबसे ज्यादा एक्टिव है, और हालिया पब्लिकेशंस क्या हैं—इनसे यह समझ आता है कि ग्रुप अभी किस पर काम कर रहा है। ओवरलैप जितना ज्यादा, फिट उतना बेहतर।

संपर्क (approach) को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति बताई गई है?

ग्रुप/फैकल्टी के साथ पर्सनल कनेक्ट बनाने पर जोर है—प्रोफाइल्स पर नियमित इंटरैक्शन (जैसे कमेंट/लाइक) करके संबंध बनाएं। फिर अपने रिसर्च इंटरेस्ट और ग्रुप की एक्टिव रिसर्च के साथ मैच दिखाकर संपर्क करें, ताकि सहयोग/कोलैबोरेशन की संभावना बढ़े।

डिपार्टमेंट-वाइज फैकल्टी सर्च कब और कैसे उपयोगी है?

जब यूनिवर्सिटी के भीतर आपके विषय से जुड़े डिपार्टमेंट्स/फैकल्टी ढूंढने हों। उदाहरण में University of British Columbia के डिपार्टमेंट्स खोलकर Research & Teaching Faculty और उनके रिसर्च एरियाज/प्रोजेक्ट्स देखे गए। फिर अपने रुचि वाले सब-एरिया (जैसे Organic Chemistry बनाम Environmental Chemistry) के अनुसार सबसे relevant फैकल्टी/प्रोजेक्ट्स चुनें और अपने काम के साथ ओवरलैप देखें।

लिंक क्लिक करते समय कौन-सी सावधानी जरूरी है?

यह सुनिश्चित करें कि क्लिक किया गया लिंक उसी यूनिवर्सिटी के आधिकारिक पेज पर ले जाए। असंबंधित लिंक दिख सकते हैं; इसलिए यूनिवर्सिटी का लिंक/डोमेन और पेज की प्रासंगिकता चेक करना जरूरी बताया गया।

Review Questions

  1. आपके रिसर्च और किसी ग्रुप के बीच ओवरलैप मापने के लिए कौन-कौन से संकेत (जैसे रिसर्च इंटरेस्ट, हालिया पब्लिकेशंस) सबसे महत्वपूर्ण हैं?
  2. देश/यूनिवर्सिटी शॉर्टलिस्ट बनाने के बाद कीवर्ड-आधारित खोज में आप किन 2–3 गलतियों से बचेंगे?
  3. डिपार्टमेंट-वाइज फैकल्टी सर्च और ग्रुप-पेज सर्च—दोनों में फिट कैसे तय करेंगे?

Key Points

  1. 1

    MS/PhD सुपरवाइजर चुनने की मुख्य कसौटी आपके रिसर्च प्रश्न और ग्रुप की चलती रिसर्च के बीच ओवरलैप है।

  2. 2

    देश/यूनिवर्सिटी की प्राथमिकता पहले तय करें, फिर चुने हुए देशों की यूनिवर्सिटीज की लिस्ट के आधार पर खोज शुरू करें।

  3. 3

    अपने रिसर्च टॉपिक से जुड़े सटीक कीवर्ड्स के खिलाफ यूनिवर्सिटीज में रिसर्च ग्रुप्स/पोजीशंस खोजें।

  4. 4

    हर ग्रुप पेज पर रिसर्च इंटरेस्ट, टीम/मेंबर्स, प्राइमरी फोकस और हालिया पब्लिकेशंस पढ़कर फिट तय करें।

  5. 5

    सिर्फ जानकारी इकट्ठा न करें—प्रोफाइल्स पर इंटरैक्शन करके पर्सनल कनेक्ट बनाएं और फिर अपने रिसर्च इंटरेस्ट के साथ संपर्क करें।

  6. 6

    डिपार्टमेंट-वाइज फैकल्टी सर्च (Research & Teaching Faculty, रिसर्च एरियाज/प्रोजेक्ट्स) तब उपयोगी है जब विषय के भीतर सही सब-एरिया चुनना हो।

  7. 7

    लिंक क्लिक करते समय यह सुनिश्चित करें कि वह उसी यूनिवर्सिटी के आधिकारिक ग्रुप/फैकल्टी पेज पर ले जा रहा है।

Highlights

सुपरवाइजर/ग्रुप चुनने का निर्णायक फैक्टर रिसर्च इंटरेस्ट का ओवरलैप है—जितना ज्यादा मैच, उतनी ज्यादा acceptance की संभावना।
कीवर्ड-आधारित खोज (जैसे “ionic liquids”) से 10–15 relevant ग्रुप्स की शॉर्टलिस्ट बनाकर देश और ग्रुप दोनों आसानी से सेलेक्ट किए जा सकते हैं।
ग्रुप पेज पर रिसर्च इंटरेस्ट के साथ हालिया पब्लिकेशंस देखना यह समझने में मदद करता है कि ग्रुप अभी किस दिशा में एक्टिव है।
पर्सनल कनेक्ट बनाने के लिए प्रोफाइल्स पर नियमित इंटरैक्शन और फिर अपने रिसर्च इंटरेस्ट के साथ संपर्क करने की रणनीति बताई गई।

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